रूसी एलएनजी का अभूतपूर्व आयात और यूरोप की आपूर्ति चुनौतियां
2026 के पहले छमाही में यूरोपीय संघ ने रूसी यामल प्रोजेक्ट से 9.9 मिलियन टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 18 प्रतिशत अधिक है। यह मात्रा लगभग पूरी उपलब्ध उत्पादन क्षमता के बराबर है, जो यूरोप की रूसी गैस पर गहरी निर्भरता को दर्शाती है। फ्रांस, बेल्जियम और स्पेन मुख्य आयातक देशों में शामिल हैं, जहां बेल्जियम के ज़ेब्रुग्गे बंदरगाह की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो रूसी एलएनजी को यूरोप भर में वितरित करता है।
हालांकि, 1 जनवरी 2027 से यूरोपीय संघ द्वारा रूसी एलएनजी पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा, जिससे यह आपूर्ति मार्ग बंद हो जाएगा। यह प्रतिबंध यूरोप के ऊर्जा बाजार में गंभीर व्यवधान पैदा कर सकता है, विशेषकर जर्मनी के लिए, जो अपनी गैस आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत बेल्जियम और नीदरलैंड्स के माध्यम से प्राप्त करता है।
जर्मनी में ऊर्जा भंडारण की स्थिति और संभावित संकट
जर्मनी के गैस भंडार इस समय केवल 44 प्रतिशत भरे हुए हैं, जबकि सामान्यतः इस समय वे लगभग 60 प्रतिशत भराव पर होते हैं। पिछली सर्दियों के बाद भंडार केवल 20 प्रतिशत स्तर पर थे, जो एक अभूतपूर्व निम्न स्तर है। गैस की कीमतों में वृद्धि ने भंडारण के आर्थिक मॉडल को प्रभावित किया है, जिससे भंडार संचालकों के लिए सर्दियों में लाभ कमाने की संभावना कम हो गई है।
गैस भंडार संचालकों के संघ INES के अनुसार, 2026-27 की सर्दियों में अत्यधिक ठंड की स्थिति में जर्मनी को प्रति दिन लगभग दो टेरावाट घंटा गैस की कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो दैनिक मांग का लगभग 40 प्रतिशत है। इस स्थिति में उद्योग क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होगा, क्योंकि इसे आपूर्ति कटौती में सबसे पहले झेलना पड़ सकता है।
यूरोप की रणनीतिक गैस भंडार योजना और दीर्घकालिक ऊर्जा मांग
जर्मन आर्थिक मंत्री काथरीना रीचे ने 24 टेरावाट घंटा की रणनीतिक गैस भंडार योजना की घोषणा की है, जो देश की कुल भंडारण क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत है। इस योजना की लागत लगभग 1.5 अरब यूरो आंकी गई है, जिसे गैस कीमतों में वृद्धि के माध्यम से वित्तपोषित किया जाएगा।
फिर भी, कोयले से विद्युतीय उत्पादन के चरणबद्ध बंद होने के कारण गैस की मांग भविष्य में बढ़ने की संभावना है। 2035 तक अतिरिक्त 22,400 से 35,500 मेगावाट के गेस आधारित पावर प्लांट्स की आवश्यकता होगी, जिससे वार्षिक गैस खपत में लगभग 15 अरब क्यूबिक मीटर की वृद्धि हो सकती है।
फ्रैकिंग पर पुनर्विचार और यूरोपीय नियमों का प्रभाव
ऊर्जा संकट के मद्देनजर जर्मनी में शेल गैस उत्पादन (फ्रैकिंग) पर प्रतिबंध को पुनः समीक्षा के लिए रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में 1000 अरब क्यूबिक मीटर तक शेल गैस भंडार मौजूद हैं, जो लगभग 50 वर्षों की आपूर्ति के बराबर है। हालांकि, राजनीतिक दृष्टिकोण इस मुद्दे पर विभाजित हैं।
साथ ही, 2027 से यूरोपीय संघ की मेथेन उत्सर्जन नियमावली लागू होने जा रही है, जो गैस के उत्पादन और परिवहन में उत्सर्जन को सीमित करेगी। इस नियम के कारण वैश्विक गैस आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आपूर्ति में कमी और कीमतों में वृद्धि की आशंका है।
भारत के लिए रणनीतिक निहितार्थ
यूरोप की रूसी गैस पर निर्भरता और 2027 के प्रतिबंध के कारण वैश्विक गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी, जिसका प्रभाव भारत जैसे उभरते बाजारों पर भी पड़ेगा। भारत के ऊर्जा सुरक्षा प्रयासों में यह स्थिति आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण की आवश्यकता को और बढ़ावा देती है। भारत को अपने LNG आयात स्रोतों में विविधता लाने, घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा के विकल्पों को मजबूत करने की रणनीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा।
इसके अतिरिक्त, यूरोप में ऊर्जा संकट से उत्पन्न वैश्विक LNG की मांग में वृद्धि, भारत के लिए गैस की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति में अनिश्चितता का कारण बन सकती है। इसलिए, भारत के लिए यह आवश्यक होगा कि वह अपने ऊर्जा भंडारण और आपूर्ति तंत्र को मजबूत करे, ताकि वैश्विक ऊर्जा संकट के प्रभावों से बचा जा सके।
स्रोत:
FOCUS online
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